Introduction on Health : दोस्तो मैं 2012-13में ही अपना ब्लॉग किसी मकसद से बनाया था। मगर सांसारिक उलझन के कारण मैं उसमें कूछ लिख न सका । उलझन का मूख्या कारण यह था कि मेरा एक छोटा बच्चा जिसका नाम था तफहीम आलम। वह Thalassemia Major से पीड़ित था। 2003 - 2021 तक मैं उसके इलाज के पीछे मैं व्यस्त रहा । मगर मैं उसे जीवित न रख सका । इलाज के पूरे काल में हमें यह महसूस हुआ कि इलाज के समय अगर आप को स्वास्थ्य ज्ञान नहीं हो तो आपका जिंदगी तबाह हो जाएगी । हमने पाया कि एलोपैथिक इलाज आप को कुछ क्षेत्रों में आपको स्वास्थ्य लाभ तो देता है,मगर इसके विपरीत दूसरे तरफ आपके स्वास्थ्य पर बहुत बूरा असर पड़ता है ।
उदाहरण स्वरूप मेरे बच्चे को ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जिंदगी तो मिल रही थी मगर दूसरे तरफ केमिकल के प्रभाव से spleen & liver ( प्लीहा एवं लिवर) पर बहुत बूरा असर पड़ा जो हमें बहुत देर में समझ आइ । जिसका एलोपैथि में संतुष्टि पूर्ण इलाज नहीं है । थैलेसिमीया ट्रीटमेंट में 25% बच्चों के साथ एसा ही होता है। हृदय रोग, थाॅयरायड, शुगर आदि भिन्न-भिन्न रोग हो जाया करता है । अगर प्रारंभ से केमिकल्स के असर को खत्म करने के लिए नैचरोपैथिक एवं आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट किया जाए तो रोगी को बेहतर जिंदगी दिया जा सकता है ।
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